ये वाणी परम शक्ति की मैं तो माध्यम हूँ लिखने कामैं साधक हूँ उसी शक्ति का इक साधन हूँ लिखने कासत्य रचयिता सृष्टि के तुमसे ही है अस्तित्व सकलशब्द पुस्तक ज्ञान प्रखर स्वाध्याय ये निज को रचने काहर शब्द नाथ हों तुम्हें समर्पित यही मात्र कामना हैपढ़े पायें उद्देश्य जन्म के मात्र मेरी ये आराधना हैसत्य असत्य श्याम श्वेत सब तुझमें निहित मूलहो सफल करे अध्ययन जो प्राणी यही प्रार्थना है।