Pari Ki Talash Ab Nahin ‘परी की तलाश अब नहीं’ उमेश यादव का दूसरा कविता संग्रह है। यह संग्रह चार खंडों में विभक्त है। कवि ने इस संग्रह की अधिकतर कविताएँ 20 से 30 वर्ष की उम्र में लिखी हैं। इन कविताओं में बचपन एवं तरुण जीवन के कई अलक्षित दृश्य हैं। स्मृतियों की कई परतें हैं। कुछ कविताएँ निजी संबंधों के अंतर्लोक से आई हैं कुछ दुनियादारी से। ये कविताएँ प्रेम को अपने ढंग से समझती हैं। परी कविताएँ इस संग्रह की सबसे बड़ी विशेषता मानी जा सकती है लेकिन वे स्वप्न के लिए यथार्थ को नहीं खोतीं। इन कविताओं में हमारे लोकविश्वासों की गूँज को सुना जा सकता है। ये कविताएँ देशप्रेम को भी नहीं भूलतीं। ये लोकतंत्र में आम व्यक्ति के अस्तित्व की तलाश भी करती हैं। इन कविताओं में सहजता और स्वयंस्फूर्त प्रवाह है। भाषा और शिल्प को बरतने की नई विधियाँ है।