<p><b> About the Book: </b></p> हिन्दी साहित्य प्राचीन काल से अपनी उत्कृष्ट सृजन क्षमता के लिए विश्व में जाना जाता है। पद्य विधाओं में आज आधुनिक परिवेश ने अनेक विदेशी देशी विधाओं को आत्मसात् किया है। हिन्दी साहित्य पद्य में महाकाव्य और खण्डकाव्य का ही प्रचलन था किन्तु भौगोलिक पर्यावरण या वैश्विक क्रांति अथवा वैश्वीकरण ने आज समूचे भू मण्डल को एक स्थान पर लाकर खड़ा कर दिया है। वर्तमान में उर्दू विधा की गज़ल हिन्दी में अपना स्थान बना चुकी है । ठीक उसी विधा में कुछ सामाजिक और कुछ _ कुछ सभी लोगों की भावनाओं को एवम अपने कुछ विचारो को शब्दों के माध्यम से कविताओं और शायरियों में पिरोकर आप लोगो के समक्ष प्रस्तुत किया है। कुछ लोगों के पारिवारिक विघटन और तनाव नये बौद्धिक समाज की एक महत्त्वपूर्ण समस्या है। इसकी एक ऐसी सूक्ष्म-संवेद्य पड़ताल यहां सहज उपलब्ध है जो आपके आस-पास या आप बीती लग सकती है। इस पुस्तक लेखन में मेरे सहयोगी जानो का ह्रदय तल से आभार व्यक्त करता हु ।<p><b></b></p><p><b> About the Author: </b></p> शिवा पंत - जन्म 25 नवम्बर 2001 को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के भटेड़ी गांव में एक सामान्य परिवार में हुआ। वर्तमान में शास्त्री (B.A) साहित्य की शिक्षा ले चुके है । बचपन से ही संगीत एवं साहित्य से लगाव होने के कारण ही नवीं कक्षा से लेखन शुरू किया था । 2023 में अपनीं कविताओं को( कलम के किरदार) नामक साझा संकलन के साथ पुस्तक में प्रकाशित किया था। इनकी अधिकतम लेखन शैली वास्तविकता के उतार चढ़ाव को शब्दों के माध्यम से कविताओं और शायरियाें में लिखना है । आशा है कि यह रचना भी आप सब के लिए आशा का चित्र बनेगी. आप इस तरह इनका हौसला अफजाही करते रहेंगे जिससे इनका लिखने का सफर यूं ही चलता रहेगा। उपनाम - अधूरे अल्फाज