‘. . . शायद जूली का यह प्रथम परिचय हो उस अनुभूति से जिसे कोई भी लड़की बड़े चाव से संजोकर संभालकर अपने में छिपाए रहती है। एक अर्न्विचनीय सुख जो पीड़ा लिए पीड़ा और सुख को डुबोती हुई उमड़ते ज्वार की खुमारी जो दो जनों को अपने में समा लेती है . . . एक दर्द जो आनंद से उपजा है और पीड़ा देता है।’यह बहुत ही महीन मानवीय अनुभूतियों की एकदम जीवंत तथा अत्यंत मर्मस्पर्शी कथा है। आधुनिक हिन्दी कथाकारों में र्स्ववाधिक चर्चित लेखक निर्मल वर्मा की बहुचर्चित तथा प्रसिद्ध कथा-कृति जो किसी भी संवेदनशील पाठक को भरपूर रसास्वादन कराने में पूरी तरह समर्थ है।