हिन्दी साहित्य लेखन एवं लेखकों को प्रोत्साहित करने हेतु अनवरत चलने वाली अपनी यात्रा में सृजन सारथी संस्था इस वर्ष एक नए साहित्यकार भूपेंद्र भोजराज भार्गव की पारिवारिकी लेकर आप साहित्य प्रेमियों के समक्ष प्रस्तुत है जहाँ एक और राजनेता अपनी राजनैतिक विरासत को बचाने हेतु भाषाई युद्ध छेड़ते हुए देश के एक प्रान्त को दूसरे प्रान्त से लढ़ाने पर आतुर है वहीं सृजन सारथी संस्था भारत की सभी भाषाओ के महत्व को समझते हुए साहित्य के माध्यम से देश को एक सूत्र में पिरोने का काम कर रही है. इसी दिशा में संस्था हिन्दी के मौलिक साहित्य (नाटक एवं कहानी) को देश के विभिन्न प्रांतो की भाषा में अनुवाद करने की और भी कदम बढ़ा चुकी है. क्योंकि सृजन सारथी संस्था इस बात में पूर्ण विश्वास करती है की भाषा संवाद का माध्यम है विवाद का विषय नहीं और यदि हम किसी प्रान्त की भाषा नहीं जानते है तो संवाद स्थापित करने हेतु किसी विदेशी भाषा के प्रयोग से बेहतर है देश में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा को राष्ट्र भाषा का दर्ज़ा दे. साहित्य एक ऐसा ही सशक्त माध्यम है और साहित्यकार उसका सिपाही और ऐसे ही एक सिपाही के रूप में हमारे सामने अपना कविता संग्रह पारिवारिकी लेकर आपके आशीर्वाद के लिए लालायित है भूपेंद्र भोजराज भार्गव।सृजन सारथी संस्था मेरी कलम मेरे गीत परिवार के साहित्यकारों में आपका स्वागत करती है एवं उज्वल भविष्य हेतु शुभकामनाये प्रेषित करती है