परिवर्तक : जेल – अधीक्षक की आत्मकथा बचपन से लेकर आज तक अपने जीवन के उतार – चढ़ाव के साथ अनवरत चलते संघर्ष से सृजित है “मेरी आत्मकथा” – “परिवर्तक” परिवर्तक होने के नाते पहले स्वयं का फिर घर परिवार के साथ म. प्र./ छत्तीसगढ़ की कई जेलों और जेलकर्मियों / कैदियों की सच्चाईयों को ब्यान करती किताब “परिवर्तक” का द्वितीया – संस्करण आम पाठकों से लेकर अपराध और कानून से जुड़े विद्वानों के पठनीय और संगृहित करने योग्य हैं राजेंद्र रंजन गायकवाड़
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