यह एक ऐसे ऊर्जावान तथा सफल भारतीय उधमी की कहनी है जो दबई में एक ु आलीशान जीवन जी रहा है और लाहौर स्थित डॉन के साथ मिलकर बड़े के नवास पर भारतीय उप महाद्वीप को समेकित रूप में प्रदर्शित करने की दृष्टि से एक फिल्म निर्मित करना चाहता है। लाहौर स्थित डॉन अपने धन का उपयोग बॉलीवड की ु फिल्मों के वित्तपोषण एवं कश्मीर में आतकवं ाद के लिए करना चाहता है। वह जिस स्टाइल का जीवन जी रहा है उसके परिणामस्वरूप उसके शाररिक सबं धं एक यवती से बन ु जाते हैं जोकि उसकी अपनी भारतीय पत्ुरी है; वह भी स्वय की ं विवाहिता महिला से जिसे उसने औलाद होने से पर्व ू तीन तलाक दे दिया था। लेकिन एक बार जब उसकी परित्यक्त पत्नी यह सच्चाई उसे बताती है तो उसे लगता है कि वह एक अदडनीय पाप कर चकुा है- और यह दर्द उस समय असहनीय हो जाता है जब वह उसके साथ अपने आमर्यादित सम्बन्धों के फलस्वरूप एक बच्चे को जन्म दे देती है। हालाकिं उसकी पत्ुरी सम्बन्धों के अपराध-बोध से अनभिज्ञ है क्योंकि इस बारे में उससे सब कुछ गुप्त रखा गया है। यह अप्राकृतिक सबं धं उधमी के मन में आत्मग्लानि एव प्रं याश्चित की भावना पैदा कर देता है और समाज के दवाब को झेलने में अक्षम होने के कारण यह सफल उधमी एक दिन स्वय को फसी के फदे पर लटका देता है।