यह एक नारी की संघर्षभरी कहानी है। गटर में पैदा हुई एक बेबाप की बच्ची बड़ी होकर अपने दिल में पल रही घृणा और महत्वाकांक्षा के बल पर किस प्रकार संघर्ष करती हुई राजमहल की शोभा बन सकी? यह इसमें बखूबी दर्शाया गया है। राजमहल में जाकर भी वह अपने भाई और बहनों की मदद करती रहती है। प्रेम से नहीं वरन घृणा से उन्हें देखती है और अपने आपसे भी घृणा करती है कि वे गरीब हैं और मैं अमीर क्यों बन गई?.
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