Patriyan
shared
This Book is Out of Stock!

About The Book

पटरियाँ स्वातंत्र्योत्तर भारत में उभरता नया मध्यवर्ग भीष्म साहनी के कथाकार को लगातार आकर्षित करता रहा। शहरी टापुओं पर भटकते इस नए यात्री की सीमाओं और विडम्बनाओं को उन्होंने कहीं थोड़ी तुर्शी तो कहीं गहरी हमदर्दी के साथ रेखांकित किया और मध्यवर्ग के रूप में बसती हुई नई नागरिकता को वृहत्त मानवीय परिप्रेक्ष्य के भूत-भविष्य के सामने रखकर बार-बार जाँचा-परखा भी। वर्ष 1973 में प्रकाशित इस कहानी-संग्रह की चौदह कहानियों में से कई उनकी इस विशेषता की साक्षी हैं लेकिन संग्रह की सबसे चर्चित कहानी अमृतसर आ गया है...’ की पृष्ठभूमि थोड़ी अलग है। आजादी के साथ आई विभाजन की विभीषिका यहाँ फिर अपनी तीव्रता के साथ उपस्थित है। यह कहानी बताती है कि जमीन का वह बँटवारा कितनी कड़वाहट के साथ लोगों के दिलों में उतरा लेकिन फिर भी उन महीन सूत्रों को निस्तेज नहीं कर पाया जो अपनी जमीनों से उखड़ने के बाद भी लोगों की साँसों में बसे थे। शीर्षक कथा पटरियाँ’ एक मध्यवर्गीय युवक की कहानी है जिसके रहन-सहन को देखकर रसोइया भी उससे ठीक व्यवहार नहीं करता लेकिन फिर जब उसका जीवन पटरी पर आने लगता है तो उसके सपने भी जुड़ाने लगते हैं। पठनीय स्मरणीय संग्रहणीय कहानियाँ।
Piracy-free
Piracy-free
Assured Quality
Assured Quality
Secure Transactions
Secure Transactions
*COD & Shipping Charges may apply on certain items.
Review final details at checkout.
319
395
19% OFF
Hardback
Out Of Stock
All inclusive*
downArrow

Details


LOOKING TO PLACE A BULK ORDER?CLICK HERE