क्या है 'पहलू' में? भारत के वीर इस रचना संग्रह के माध्यम से कवि ने समाज के विभिन्न पहलूओं को छूने का अनूठा प्रयास किया है। एक जिज्ञासु मन ने इन पहलूओं से प्रश्न कर उनकी वेदना और चेतना को पिरोकर एक माला बनाई है। अनछुए समाज के ही पहलुओं पर समाज का ध्यान आकृष्ट करना भी इस रचना संग्रह का प्रयास है। साधारण बोलचाल की भाषा हिंदी-उर्दू के शब्दों में लिखी गयी सभी रचनाएं पाठक के मन तक भी पहुंचने का प्रयास करती है। इस किताब के माध्यम से भारत के उन वीरों के परिवारों को भी सहायता पहुंचाने का प्रयास है जिन्होंने इस देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। गुलशन से निकाल कर कांटे उसने हाथों को बतलाया है कि तक़लीफ़ फूलों को भी है बस वो बेजुबां बोल नहीं पाते।।