ऐसे काल में जब समय की गति भंग होने लगी हो और साहित्य दिग्भ्रमित हो तब कड़ी चुनौतियों के बीच रचने की निरंतरता और साहित्यिक पत्रिकाओं का निर्बाध प्रकाशन आशान्वित करता है। इस संग्रह की कविताएँ निरी भावनात्मक कविताएँ हैं। इनमें स्नेह है प्रेम है आत्मीयता है देर तक साथ रहने और साथ रऽने की मंशा है। दुनिया को देऽने और समझने का नजरिया हैं। क्षोभ संताप आक्रोश और देह से परे प्रेम के अतिरिक्त इन कविताओं में जीवन के साक्ष्य हैं। चाहता हूँ जिन हाथों तक पहुँचे इन्हें पढ़ा जाये अनुभूत किया जाये। मूल्यांकन भी आप ही करें। -शैलेन्द्र शरण