पिव पिव लागी प्यासमन चित चातक ज्यूं रटै पिव पिव लागी प्यास। नदी बह रही है तुम प्यासे खड़े हो; झुको अंजुली बनाओ हाथ की तो तुम्हारी प्यास बुझ सकती है। लेकिन तुम अकड़े ही खड़े रहो जैसे तुम्हारी रीढ़ को लकवा मार गया हो तो नदी बहती रहेगी तुम्हारे पास और तुम प्यासे खड़े रहोगे। हाथ भर की ही दूरी थी जरा से झुकते कि सब पा लेते। लेकिन उतने झुकने को तुम राजी न हुए। और नदी के पास छलांग मार कर तुम्हारी अंजुली में आ जाने का कोई उपाय नहीं है। और आ भी जाए अगर अंजुली बंधी न हो तो भी आने से कोई सार न होगा। शिष्यत्व का अर्थ है: झुकने की तैयारी। दीक्षा का अर्थ है: अब मैं झुका ही रहूंगा। वह एक स्थायी भाव है। ऐसा नहीं है कि तुम कभी झुके और कभी नहीं झुके। शिष्यत्व का अर्थ है अब मैं झुका ही रहूंगा; अब तुम्हारी मर्जी। जब चाहो बरसना तुम मुझे गैर-झुका न पाओगेओशो पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदु* भक्ति की राह में श्रद्धा की अनिवार्यत*प्रेम समस्या क्यों बन गया है* धर्म और नीति का भे* समर्पण का अर्* शब्द से निःशब्द की ओर.जीवन की खोजजीवन क्या है?उस जीवन के प्रति प्यास तभी पैदा हो सकती है जब हमें यह स्पष्ट बोध हो जाए हमारी चेतना इस बात को ग्रहण कर ले कि जिसे हम जीवन जान रहे हैं वह जीवन नहीं है । जीवन को जीवन मान कर कोई व्यक्ति वास्तविक जीवन की तरफ कैसे जाएगा? जीवन जब मृत्यु की भांति दिखाई पड़ता है तो अचानक हमारे भीतर कोई प्यास जो जन्म-जन्म से सोई हुई है जाग कर खड़ी हो जाती है । हम दूसरे आदमी हो जाते हैं। आप वही हैं जो आपकी प्यास है । अगर आपकी प्यास धन के लिए है मन के लिए है अगर आपकी प्यास पद के लिए है तो आप वही हैं उसी कोटि के व्यक्ति हैं। अगर आपकी प्यास जीवन के लिए है तो आप दूसरे व्यक्ति हो जाएंगे। आपका पुनर्जन्म हो जाएगा।ओशोपुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदुःवास्तविक जीवन क्या है?चित्त की स्वतंत्रता ही सत्य का मार्ग हैन तो विचार द्वार है न अविचार द्वार है-द्वारर है निर्विचार-सजगताजीवन को तो वही उपलब्ध होगा जो जागरण के पक्ष में हो.