“दरबदर परदेसी” एक भावनात्मक और सामाजिक रूप से गहरी कविता-संग्रह (poetry collection) है जो उन प्रवासी मजदूरों कामगारों और अनसुने लोगों की आवाज़ बनती है जो अपने घर-परिवार से दूर रहकर जीवन जीने के लिए संघर्ष करते हैं। जैसा कि उपशीर्षक “Poems of The Unsung Migrants” से स्पष्ट है यह रचना उन लोगों की कहानियाँ कहती है जिनकी मेहनत तो दिखाई देती है लेकिन उनकी पीड़ा और पहचान अक्सर अनसुनी रह जाती है।