‘‘पूनम” संग्रह की कहानियाँ कहानियों की परिधि में आती हैं या केन्द्रक बनकर समय को एक केन्द्र प्रदान करती हैं यह बात तो समय के गर्भ में है परंतु इनका पाठ इनका आस्वाद मन-मानस को तृप्ति और जिज्ञासा प्रदान करता है। ये कहानियाँ अपने गठन में सरल हैं कहन में सहज हैं और प्रभाव में सफल हैं। इन कहानियों में कथा तत्वों की सहज निष्पति प्राप्त हैं। भाषा शैली सहज है शब्द चयन देशकालोचित है वाक्य विन्यास पात्रगत हैं। वर्णन शैली अद्भुत है गद्यबिंब प्रभावी हैं। संवाद सहज और सुबोध हैं। कथा तत्व सर्वत्र उपस्थित हैं । कहानियों के शीर्षक संक्षिप्त और कथा की आत्मा द्योतक हैं। कहानियों का उद्देश्य महद् है तो औचित्य महत्तर।‘धर्मेवरक्षति’ ‘धर्मेवजयते ‘हेमू’ और ‘प्रेमावतार’ जैसे चार वृहदकाय उपन्यास लिखने वाले श्री तारकेश्वर उपाध्याय जी की सामाजिक चेतना की फलश्रुति है निःसंदेह इस कथा संग्रह ‘पूनम’ ज्योत्सना से हिन्दी कथा-साहित्य निर्मल शीतल और अमल-धवल-नवल हो उठेगा। सभी कहानियाँ पठनीय स्वागतयोग्य स्तुत्य सामाजिक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक हैं।
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