प्रभावती सूर्यकान्त त्रिपाठी ''निराला'' का एक प्रमुख उपन्यास है जिसमें सामाजिक सुधार नारी स्वतंत्रता और भारतीय समाज में व्याप्त रूढ़ियों का चित्रण किया गया है। यह कहानी एक ऐसी नारी की है जो अपनी इच्छाशक्ति बुद्धिमत्ता और आत्मसम्मान के बल पर जीवन के संघर्षों का सामना करती है। प्रभावती केवल एक स्त्री नहीं बल्कि एक विचारधारा का प्रतीक है जो सामाजिक बंधनों को तोड़कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ती है। निराला ने इस उपन्यास में नारी जाति की दुर्दशा पुरुष प्रधान समाज की कठोरता और सामाजिक अन्याय को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया है।
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