ये कहानियां आज से पच्चीस वर्ष पूर्व अर्थात 1991 से 1994 के मध्य लिखी गई थी। मैं इस अवधि में नैनीताल में सेवारत था। कभी सोचा भी नहीं था कि ये प्रकाशित होकर आएँगी। प्रतीक्षा में कहानियों को मैंने युवा मन का विरह एवं मिलन माँ की ममता भाभी का मातृत्व भाव दीदी का स्नेह सौतन का अपनापन दोस्त का त्याग का चित्रण करने की कोशिश की है। इस कहानी को मैं विस्तृत रूप देना चाह रहा था। 1994 के बाद कभी समय ही नहीं मिला कि कहानी को आगे बढ़ाऊं। सेवा निवृत्त के बाद पारिवारिक एवं सामाजिक दायित्व और अधिक बढ़ जाने से बाध्यतामूलक इस कहानी को इस वर्ष द्वितीय खंड जोड़कर एवं भारतीय मनोस्थिति को ध्यान में रखते हुए समाप्त करना पड़ा।