Pravasita Priya : Vanvasini Sita (प्रवासिता प्रिया : वनवासिनी सीता)
shared
This Book is Out of Stock!


*COD & Shipping Charges may apply on certain items.
Review final details at checkout.

LOOKING TO PLACE A BULK ORDER?CLICK HERE

148
200
26% OFF
Paperback
Out Of Stock
All inclusive*

About The Book

‘प्रवासिता प्रिया' में सीता को राम की प्रतिछवि के रूप में नहीं एक ओजस्विनी इकाई के रूप में एक तेजस्वी नारी के जीवन्त प्रतीक के रूप में उकेरा गया है । इसलिए इस कृति का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण और मार्मिक अंश सीता का संबोधन और स्वर्गारोहण ( सर्ग 18 ) है जिसमें सीता नारी के प्रति युग-युग से होते आए अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध स्वर उठाती है और नारी के स्वाभिमान का जयघोष कर राम सहित सारी सभा को एक साथ हतप्रभ और भावाभिभूत कर देती है । यह मर्मभेदी प्रसंग इतनी तन्मयता और तार्किक निपुणता के साथ रचा गया है कि पढ़कर मन और मस्तिष्क दोनों उद्वेलित हो जाते हैं ।
Piracy-free
Piracy-free
Assured Quality
Assured Quality
Secure Transactions
Secure Transactions
Fast Delivery
Fast Delivery
Sustainably Printed
Sustainably Printed
downArrow

Details