मेरी ये पहली किताब मेरे लिए बिल्कुल वैसी है जैसे कि एक स्त्री के जीवन में उसका पहली संतान का आगमन हो।वैसा ही उत्साह भी मगर अनभिज्ञता सी भी । महामारी और लॉकडान जहाँ एक अभिशाप था वहीं मेरे हाथों ने कलम थामी शुरू हुआ एक नया सफ़र लेखनी का सफ़र जिसका ककहरा भी नहीं ज्ञात था। दिल की भावनाओं को बस लफ़्ज़ों की स्याही में डूबो कर बस सफ़े दर सफ़ेद उड़ेलती चली गयी। किसी एक विषय पर न होकर विविध विषयों और भावनाओं का सम्मिश्रण है ये मेरी कविताएँ। उम्मीद करती हूँ इसे आप सब सुधी पाठकों का प्यार मिलेगा।
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