मानव जीवन की शुरुआत होती है जन्म से लेकिन माँ के गर्भ में बच्चा क्या सोचता है वहाँ से शुरुआत होती है संगीता ‘सरगम’ की कविताओं की। इन कविताओं को पढ़ेंगे तो लगेगा कि इसे संगीता नहीं आप ख़ुद कह रहे हैं। अच्छे लेखन का मानक यही होता है कि पाठक उसे ख़ुद से जोड़कर भावों के उसी स्तर पर पहुँच जाए जहाँ बैठकर कवि ने उसे लिखा है। जन्म से होते हुए जन्मदिन की ख़ुशियों तक और फिर ईश्वर की आराधना तक पहुँचने की यह यात्रा कविताओं की रेलगाड़ी में बैठाकर आपको अद्भुत आनंद देने वाली है।