इस पुस्तक में व्यभिचारी और सदाचारी व्यक्ति का भेद करते हुए एक ऐसी कथा का ताना-बाना बुना गया है जो हरेक युग में प्रासंगिक रहेगी। इसके लेखक स्पष्ट लिखते हैं कि जो भी वासना की दृष्टि से औरत को देखता है समझ लो कि वह अपने दिल में उससे व्यभिचार कर चुका है|