PRINCESS OF IQARAS


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About The Book

दिवाकर भारत का एक युवा वैज्ञानिक है जिसके पिता को दूर अल्फा सेंचुरी सौरमंडल के सायरस ग्रह के वैज्ञानिक प्रमुख ने बंदी बना लिया था । अपने इक्कीसवें जन्मदिन पर वह अपनी माँ से जिद करके सारी घटना जानकर अपने अंकल शिवेंद्र जी और कुछ अन्य वैज्ञानिकों के साथ सायरस पर पहुँचकर अपने पिता को मुक्त कराता है। लौटते समय इकारस ग्रह के महामहिम उसे अपने ग्रह पर बुलाते हैं । सायरस वाले इकारस की राजकुमारी अणिमा का अपहरण कर लेते है जिन्हें दिवाकर छुड़ा लाता है जिससे प्रसन्न होकर महामहिम उससे अणिमा का विवाह कर उसे ईकारस का भावी महामहिम घोषित कर देते हैं। पृथ्वी पर वापस आते समय शुक्र गृह के शासक जेद और जेद्दारा उसे अपना उत्तराधिकारी चुन लेते हैं ।इकारस की यहारानी का सायरस वाले अपहरण कर लेते हैं जिन्हें जेड मुक्त कराते है । सायरस और इकारस में हुए युद्ध में इकारस विजय प्राप्त करता जिसके बाद उत्सव मनाया जाता है । जेड के अनुरोध पर दिवाकर –अणिमा शुक्र पर आते हैं जहां उनका भव्य स्वागत होता है। उसी रात शुक्र के शाही कोषागार से बीस बिलियन के हीरे पंडोरा के लुटेरों के प्रमुख विलियम द्वारा चुरा किए जाते हैं । दिवाकर विलीयम के गैंग को पकड़कर हीरों को वापस लाने कीप्रतिज्ञा करता है । इससे आगे की कहानी जानने के लिए’’ प्रिंसेस आफ इकारस’’ सीरीज का दूसरा भाग’’ राबर्ज आफ पंडोरा ‘’पढ़िये ।
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