प्रेमचंद हिंदी साहित्य के ऐसे कथाकार का नाम है] जिससे सामान्य से सामान्य व्यक्ति भी परिचित है। प्रेमचंद की कहानियों की पहुँच घर&घर तक है। उनके दृष्टि&पथ में जो कुछ भी आया] वह उनके साहित्य का हिस्सा बनता गया। उन्होंने अपने साहित्य में सबकुछ स्वीकार किया। उन्होंने किसी को भी उपेक्षित नहीं किया। उनकी दृष्टि में सब एक समान थे। यह पुस्तक उनकी रचित कुछ कहानियों का संग्रह है। यह कहानियाँ हमें इस बात से अवगत करवाती हैं कि वह दीन&दुखियों के पक्षधर] कृषकों के मित्र] अन्याय के विरोधी] शोषण के शत्रु और साहित्य के देवता थे।