“वर्तमान में बहुचर्चित कुतुबमीनार ही भारत के स्वर्णयुग में जन्मे वराहमिहिर की वेधशाला है। <br>- डॉ. भोजराज द्विवेदी<br>आचार्य वराहमिहिर को लेकर जोधपुर विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग के अन्तर्गत लिखा गया यह पहला शोधग्रन्थ है जिस पर शोधकर्त्ता को 'डॉक्टरेट' की उपाधि प्रदान की गई। इस शोधग्रन्थ की भूमिका सम्पूर्णानन्द विश्वविद्यालय के कुलपति पद्मश्री डॉ. मण्डन मिश्र ने स्वयं लिखकर इसे भारतीय इतिहास का अमूल्य दस्तावेज बताया है।