मृत्यु को निहारती मैं मोक्ष की प्रतिक्षा में निष्काम हूं सच झूठ के प्रपंच से स्वतंत्र हूं अपने पराये के भेद से परे हूं मैं भयमुक्त होकर कृष्ण शरणागत हूं मैं श्री जी और श्री हरि के आसरे हूं। मैं राधा कृष्ण के प्रेम में आसक्त हूं मैं ईश्वर के प्रेम में मग्न हूं।।