प्रेम अर्धनारीश्वर है। प्रेम हृदय का आनंद है। प्रेम आत्मा का सुख और चेतना की चैतन्य अभिव्यक्ति है। प्रेम आत्मा का धर्म है और धर्म की आत्मा है प्रेम जीवन का 'बीजक' है। जिनकी आत्मा में प्रेम का बीजक बसा है वे प्रेम के पर्याय रूप में मनुष्य हैं। प्रेम धर्मों का भी बीजक मंत्र है और जीवन का भी। समय का दंडविधान निष्पक्ष होता है। राजाओं का इतिहास जर्जर पृष्ठों में हाँफ रहा है लेकिन प्रेम की वाणी संतों की रागिनी बनकर शब्दों और कंठों में समाई है। कबीर मीरा और सूर के पद समय की सच्चाई के साक्षी हैं जिन्होंने अर्थ की देह से शब्दों के आवरण को हटाकर जीवन- अर्थ की साधना की।<br>प्रस्तुत पुस्तक में इसी तरह की कविताएँ संकलित हैं आशा करते हैं पाठक इनको पसंद करेंगे।