ह मूलतः रामजी की कथा पर आधारित है। इसमें कवि ने रामजी के जीवन को दर्शाया है। इस पुस्तक में रामजी के अद्भुत जीवन की ऐसी कहानियों का वर्णन किया गया है जो प्रचलित नहीं हैं पर पाठक को चित्ताकर्षक करने वाली हैं।श्रीमती रेखा श्रीवास्तव एक ‘नवल’ लेखिका हैं जिन्होंने अपने जीवन के सारे ज्ञान को इस पुस्तक ‘राघवीयम्: एक अध्ययन’ में संजोने का प्रयास किया है। वो प्रयागराज की रहने वाली हैं तथा अपनी पढ़ाई भी इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पूरी की। उन्होंने संस्कृत में मास्टर्स किया है। संस्कृत में उन्हें बहुत रुचि थी इसलिए उन्होंने पीएचडी करने का निश्चय किया।तभी उन्हें राघवीयम् पुस्तक का भावार्थ करने का कार्य मिला। लेकिन जैसी हर भारतीय नारी की कहानी होती है उनके साथ भी ऐसा ही हुआ........ पारिवारिक कार्य में इतनी व्यस्त हुईं कि स्वयं की पढ़ाई त्यागनी पड़ी। किन्तु पूरे जीवन में उन्हें इस बात का ध्यान रहा। अब सीनियर सिटीजन अवस्था में उन्होंने फिर से कलम उठाने की हिम्मत की है। फिर से अपनी रुचि को समय देने का विश्वास उठाया है। अपने पूरे जीवन में उन्होंने अनेक भक्ति ग्रंथ का अध्ययन किया। भागवत पुराण उपनिषद् का भी ज्ञान अर्जित किया। अब इन सब को संजो के राघवीयम् को पुनः समझा और हिंदी में उसका सार और ज्ञान समाहित कर प्रस्तुत कर दिया।