मैं सब-इन्सपेक्टर योगेश शिंदे गोरे गाँव पुलिस स्टेशन । ये कहानी है मेरे दोस्त राज की जो अपनी गुमशुदा वाइफ को कई सालों से दिल्ली से मुम्बई ढूँढ रहा था लेकिन हर बार उसको नाकामयाबी ही हासिल हुयी । एक दोस्त के नाते मैंने राज की गुमशुदा वाइफ को ढूँढने का बीड़ा उठाया और उसको इन्साफ दिलाने का प्रण लिया। लेकिन केस क्लोज होने के बाद राज की जिन्दगी के कई ऐसे अविश्वसनीय और अकल्पनीय राज खुले जिसका अंदाजा मैं जिन्दगी में भी नहीं लगा सकता था। स्वागत है आपका फिर से खून के बाद एक रहस्यमयी और रोमान्चकारी उपन्यास राज-गौतमी में जो आपको राज और उसकी वाइफ का सच जानने के लिये मजबूर कर देगा।