कविताओं की फुलवारी से सजी हुई कविता संग्रह किताब है रजनीगंधा पिछले 20 वर्षों से लिखी रखी हुई कविताएं है। कुछ एकदम प्रेम तो कुछ चाँद कुछ यादे तो कुछ मन मे संजोए हुए पल है रजनीगंधा में। हम जन्म लेते है तब प्रारब्ध को छोड़ साथ कुछ नही रहता किन्तु समय का पानी जब बहता रहता तो कुछ यादे कुछ लम्हे कुछ गपशप एक काई सी निचली सतह के पानी सी मन मे जम जाती। कोई बात करके ठहर जाता कोई नीर संग बहने देता इन भावनाओ को। रजनीगंधा में ऐसे ही कुछ जीवन के पल हंसते ठहरते और आंखों से बहते हुए है।