Rajasthan Me Lok Nidhi Ki Triveni

About The Book

राजस्थान में लोक निधि की त्रिवेणी अश्विनी कुमार दवे आनन्दप्रस्तुत पुस्तक में लोक जन समुदाय की पारम्परिक गीतों कहावतों और माण्डणों पर ध्यान खींचा है। इस बदलते परिवेश में इन थातियों को संजोये रखना ही उद्देश्य रहा है। भारतीय संस्कृति के मूल आधार संस्कार और उनकी उपयोगिता पर भी विस्तृत चर्चा करके यह बतलाने की चेष्ठा की है कि विश्व की अन्य संस्कृतियां लोक में विलीन हो चुकी है परन्तु भारतीय संस्कृति आज भी अजर अमर है। संस्कारों को बनाये रखना हमारी संस्कृति का स्थायित्व है। ज्ञान के चोखो चुभते वाक्यांशों में कहावतें मनुष्य को सचेष्ट करती है। साथ ही जीवन को सार्थक बनाने का सन्देश देती हुई सहायक साबित होती है।लोक कला हमारी धार्मिक भावनाओं की अभिव्यक्ति है और यह लोक कला धार्मिक सहिष्णुता का संदेश है।
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