एक ऐसा रचनाकार जो पाठकों और आलोचकों - दोनों की पसंद की कसौटी पर खरा उतरा है और जो कहानी कविता नाटक और साहित्य की अन्य विधाओं में सहजता से प्रवेश कर लेता है उसके लेखन का समग्र आकलन सरल कार्य नहीं है। फिर भी जब ज्ञानरंजन संजीव उदय प्रकाश सूर्यबाला निरंजन श्रोत्रिय भारत भारद्वाज बलराम जितेन्द्र श्रीवास्तव नीरज खरे दामोदर खड़से सुरेश कांत जैसे दिग्गज लेखक और आलोचक राजेन्द्र श्रीवास्तव के लेखन पर सकारात्मक टिप्पणियां करते हैं तो आकलन का यह कार्य आसान हो जाता है। इस किताब में राजेन्द्र श्रीवास्तव की चर्चित और प्रतिनिधि रचनाओं में से भी श्रेष्ठ को छानकर एक जिल्द में बांधने की कोशिश की गई है। उनके रचनाकर्म पर प्रबुद्ध आलोचकों की समीक्षाएं भी शामिल की गई हैं। कथाकार के रूप में राजेन्द्र श्रीवास्तव ने बहुत प्रतिष्ठा अर्जित की है। सिरमौर पत्रिकाएं तथा देश के शीर्ष प्रकाशक उन्हें सम्मान से प्रकाशित कर रहे हैं। उनकी कहानियों की मूल्य-दृष्टि विषयों की व्यापकता और कथा-वैविध्य को देखते हुए हमने उनकी कहानियों को कई वर्गों में प्रस्तुत किया है यथा - स्त्री पर केन्द्रित कहानियाँ शोषित आमजन पर केन्द्रित कहानियाँ प्रेम पर केन्द्रित कहानियाँ नौकरशाही पर केन्द्रित कहानियाँ संवेदनशून्यता पर केन्द्रित कहानियाँ आदि।