कहते हैं यह दुनिया एक बहुत बड़े उपन्यास की तरह है और हम इसके बहुत ही छोटे से किरदार हैं तथा हमारा जीवन इस उपन्यास की छोटी छोटी कहानियां। जैसे जैसे वक्त गुजरता है कहानियां आगे बढ़ती रहती हैं और अगली कहानी के शुरू होने के लिए पिछली कहानी को ख़त्म होना ही होता है। लगभग सभी कहानियों के विषय एक से रहते हैं बस किरदार बदलते रहते हैं और उपन्यास की पूर्णता के लिए अनिवार्य होता है। यह किताब भी उन्हीं अनगिनत कहानियों में से एक छोटी सी कहानी को बयां करती है। जिसे हम सबने कभी न कभी जिया देखा या अखबारों में पढ़ा ज़रूर होगा। आप किताब को पढ़िए और अपने जीवन के उस अनकहेअनछुए हिस्से से एक बार फ़िर से मिलिए और उस पर मनन कीजिए। इसी उम्मीद के साथ मैं आपको किताब के साथ छोड़ता हूं.......आपका अपना~ कृष्ण नंदन