यह कहानी दो पीढ़ियों के बीच एक खूबसूरत रिश्ते को अपने शब्दों में पिरोती है जिसके मुख्य पात्र हैं दादा और उनकी पोती। दादा बहुत ही व्यावहारिक मित्रावत् और जीवंतता से भरपूर व्यक्तित्व के धनी हैं और पोती चुलबुली लेकिन परिपक्व और समझदार। जीवन में अन्य लोगों पर उनका पड़ने वाला प्रभाव ही कहानी का कथ्य है। यह पुस्तक युवा पीढ़ी के लिए पवित्र पुस्तक रामायण के द्वार खोलती है जो नई पीढ़ी के लिए आज भी प्रासंगिक है पुस्तक उनमें नजदीकी बढ़ाने का एक कथात्मक प्रयास है। ये कहानी है एक परिवार की या राम की ये तो आप ही बताइए। इस कहानी को जैसा मैंने जाना-समझा उसका संक्षेप में वर्णन किया। अब ये उन समस्त पढ़ने वाले पाठकों को समर्पित है जिन्हें संयुक्त परिवार समाज और राम में विश्वास है। उन समस्त पाठकों को मेरा नमन है।