Ramkrishna Paramhansa (रामकृष्ण परमहंस)


Delivery Options
Please enter pincode to check delivery time.
*COD & Shipping Charges may apply on certain items.
Review final details at checkout.

LOOKING TO PLACE A BULK ORDER?CLICK HERE

About The Book

रामकृष्‍ण का जब उदय हुआ था लगभग उसी समय बंगाल में ब्रह्मसमाज की स्‍थापना भी हुई थी। कालान्‍तर में रामकृष्‍ण द्वारा स्‍थापित संघ के प्रचार-प्रचार से ब्रह्मसमाज के माध्‍यम से भारतवासियों के अरद्ध ईसाईकरण की प्रक्रिया कम होती गई और आज केवल ब्रह्मसमाज का नाम शेष है। कोई विशेष गति नहीं। इसका श्रेय रामकृष्‍ण परमहंस को ही देना श्रेयस्‍कर होगा।<br>श्री रामकृष्‍ण की जीवनी उनके भक्‍तों में प्रचलित धारणाओं तथा उनके द्वारा लिखित जीवनियों अथवा साहित्‍य के आधार पर जितनी अधिकृत हो सकती थी लेखक ने उसके लिए अधिकाधिक प्रयत्‍न किया है। परमहंस के भक्‍तों ने लेखक ने जिन ‘लीला प्रसगों’ का उल्‍लेख किया है लेखक उनमेंसे उनके यथार्थ जीवन को खोजने का यत्‍न किया है। उसका ही परिणाम यह जीवन-चरित्र है।
Piracy-free
Piracy-free
Assured Quality
Assured Quality
Secure Transactions
Secure Transactions
Fast Delivery
Fast Delivery
Sustainably Printed
Sustainably Printed
downArrow

Details