कायदे से देखा जाए तो रंगीले जी हम सब के भीतर कहीं ना कहीं मौजूद हैं । आज के हालात में जब हर इंसान अपनी रोजमर्रा की चुनौतियों से जूझ रहा है पारिवारिक एवं व्यवसायिक जीवन को चलाने के लिए भाग दौड़ कर रहा है तो उस भागदौड़ के बीच भी कुछ हल्के-फुल्के पल उसकी जिंदगी में आते हैं जब उसे भी लगता है की जिंदगी सिर्फ ब्लैक एंड व्हाइट नहीं है बल्कि उसमें और भी दूसरे रंग मौजूद है । जीवन के इन्हीं हल्के-फुल्के रंगों को संजोकर जिंदगी की किताब को पूरा करने का एक छोटा सा प्रयास यह व्यंग्य संग्रह है। इन कविताओं में वर्तमान के सामाजिक एवं राजनीतिक अंतर्विरोधों एवं पूर्वाग्रहो॔ पर व्यंग्य है।