पिछले दो-ढाई दशकों से हिन्दी में युवा कथाकारों की जो पीढ़ी उभरकर आई है हनीफ़ मदार उनमें एक बहुत महत्वपूर्ण शख़्सियत हैं। इनकी कहानियों में ट्रीटमेंट की जो सादगी और सहजता है वह उनके जीवन का प्रतिबिम्ब है। यहाँ ज़ोर-ज़बरदस्ती से कुछ रचने की कोई क़वायद नहीं है। उनका लेखन स्वतः स्फूर्त एवं उनके अनुभवों की रचनात्मक संवेदना है। इनकी कहानियाँ ख़ुद इनके सोच विचार सिद्धांतों और मूल्यों की भी सहज प्रतिबिम्ब होती हैं और इनके पीछे इंसानियत और समाज के प्रति गहरी प्रतिबद्धता एवं मानव मूल्यों के लिए संघर्ष है जो उनके विषय के शिलालेख हैं। -शंकर संपादक ‘परिकथा’