रत्न-उपचार की पद्धति वैदिक परंपरा और भारतीय ज्योतिषशास्त्र पर आधारित है। आकाश में विचरण करने वाली 12 राशियों में 9 ग्रहों के भ्रमण व ब्रह्माण्डीय स्पन्दन से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा खगोल से प्राणीमात्र पर कभी अनुकूल एवं कभी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। रत्न उन ग्रहों द्वारा प्रेषित प्रकाश एवं स्पंदन को संग्रहीत करते हैं। इसलिये अनुकूल रत्न का चयन पहनने वाले को अवश्य ही शुभ लाभ देता है। अनेक मूल्यवान व अल्पमोली रत्नों के विषय में वैदिक काल से प्रचलित इस प्रमाणिक गुहृयतम ज्ञान को विद्वान लेखकों ने बहुत सरल भाषा में प्रतिपादन करने का महती प्रयास किया है।<br>- भौरी लाल काला