‘रवाँ अल्फ़ाज़ सीमीं के’ हर हाल में सकारात्मक रहने का संदेश देने वाली कविताओं का संग्रह है। इसमें सामाजिक परिवेश का बिखरा ताना-बाना पर्यावरण ह्रास पर चिंतन के साथ-साथ उनमें सुधार करने के सुझाव भी हैं। बच्चों के लिए भी देश-प्रेम आज़ादी एकता और भाईचारा पर्यावरण संरक्षण का महत्व बताती हुई कविताएं हैं। ज़्यादातर रचनाएं लयात्मक शैली में हैं जिनको गाया जा सकता है साथ ही कुछ रचनाएं ऐसी भी हैं जिन्हें संगीतकार की दी हुई धुन पर लिखा गया है। भाषा सरल रखने का प्रयास किया गया है। जुबान पर शब्द चढ़ सकें इस वजह से हिन्दी और उर्दू दोनों शब्दों का प्रयोग करके गंगा-जमुनी तहज़ीब को ज़िंदा रखने की कोशिश की गई है। सबसे बड़ी चीज़ इन कविताओं में आशा और सकारात्मकता का संचार करने का प्रयास किया गया है। समस्त संसार को एक परिवार की तरह देखकर ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की अवधारणा को फलीभूत करने की कोशिश की गई है। उम्मीद है अपने इस उद्देश्य में सफल रहेंगे।