रवानियाँ अखिल भारतीय स्तर पर रेलवे मंत्रालय द्वारा काव्य/ग़ज़ल संग्रह के लिए मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कार योजना वर्ष 2023 प्रथम पुरस्कार से सम्मानित। “रवानियाँ” : गंगा-जमुनी तहज़ीब को समेटे हुए एक नायाब कविता-संग्रह है जो भावनाओं आत्मनिरीक्षण और जीवन के अनुभव रूपी लफ़्ज़ों के धागों से बुना हुआ है। इसमें भक्ति देशप्रेम मातृप्रेम रिश्ते प्रेम विरह सपने समाज और जीवन के लगभग सभी पहलुओं को एक नए अंदाज़ में पेश किया गया है। हर पन्ना एक नया दृश्य एक नया भाव और एक नया संदेश लेकर आता है। लेखक का हिन्दी से बहुत लगाव है और उर्दू अक्सर ही इनकी कविताओं नज़्मों में दबे पांव चली आती है। लिखने का अनोखा अंदाज़ पारंपरिक शैली से काफी हटकर है। लिखते हैं ये आस दिलों की ये प्यास लबों की लिखते हैं! छलकाते हैं जज़्बात कलम से ये आवाज़ दिलों की लिखते हैं! आशा है ये काव्य संग्रह आपकी भावनाओं को आपके रिश्तों को और आपकी आशाओं को एक नया आयाम देगा।
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