2025 की शुरुआत में दिल्ली की राजनीति ने एक अप्रत्याशित करवट ली । चुनावी नतीजों ने न केवल पुराने समीकरणों को उलट दिया बल्कि राजधानी की राजनीतिक संस्कृति को भी नई दिशा दी।<br><br>“दिल्ली 2025 : रेखा गुप्ता का सियासी सफ़र इस ऐतिहासिक परिवर्तन की परतों को बारीकी से खोलती है। यह पुस्तक आंकड़ों और चुनावी नतीजों से कहीं आगे बढ़कर उस मनोवैज्ञानिक सामाजिक और रणनीतिक बदलाव की पड़ताल करती है जिसने इस बार की राजनीति को आकार दिया।<br><br>अरविंद केजरीवाल की बदली हुई छवि भाजपा की आक्रामक लेकिन चतुर रणनीति और दिल्ली के मतदाताओं की अपेक्षाओं में आये बदलाव ने मिलकर जिस ऐतिहासिक जनादेश को जन्म दिया वह यहाँ प्रत्यक्षदर्शी लेखक की कलम से संपूर्ण विवेचन में दर्ज किया गया है। खासतौर से रेखा गुप्ता का छात्र राजनीति से दिल्ली की मुख्यमंत्री पद तक का सफ़र उनके संघर्ष धैर्य और अद्भुत रणनीतिक कौशल की मिसाल के रूप में प्रस्तुत किया गया है।<br><br>यह पुस्तक एक राजनीतिक विश्लेषण से अधिक दिल्ली शहर की धड़कनों को समझने की एक कोशिश है एक ऐसा शहर जो पुराने भ्रमों की धुंध से बाहर निकलकर नए सपनों की ओर कदम बढ़ा रहा है। सत्ता के गलियारों से लेकर चुनावी जमीनी हकीकत तक यह कहानी पाठक को राजनीति के उस रोमांचक सफ़र पर ले जाती है जहाँ हर मोड़ पर बदलाव दस्तक देता है।<br>यदि आप राजनीति की अनिश्चित लय नेतृत्व के उदय और लोकतांत्रिक परिवर्तन की गहराइयों में रुचि रखते हैं तो यह पुस्तक आपके लिए अनिवार्य है।