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About The Book
Description
Author
हर इंसान के अन्दर एक पैदाइशी कवि या लेखक छुपा होता है. फ़र्क बस इतना सा होता है कि कुछ लोग उसे पहचान लेते हैं और कुछ लोग नहीं. यही पहचानने और न पहचानने की तपस्या ही एक इंसान को एक कलाकार बना देती है और दोनों एक होते हुए भी अलग लगते हैं.प्यार भी ऐसा ही एक बीज है जो पैदा होते ही हमारे मन की मिट्टी में जन्म लेता है. वो धीरे धीरे बड़ा होकर एक पौधा बनता है और पौधे से एक विशाल पेड़. ये प्यार कई लोगों में बंट जाता है और अलग-अलग तरीक़े से अलग-अलग दिलों में घर करता है- परिवार के लिए अलग माँ-बाप के लिए अलग दोस्तों के लिए अलग रिश्तेदारों के लिए अलग और किसी ख़ास शख्स़ के लिए अलग.ऐसी ही एक शख्सियत को बयाँ करती ये नज़्में हैं जिन्होंने वक़्त-वक़्त पर जन्म लिया और प्यार के पेड़ को और विशाल बनाती गयीं. अब ये नज़्में पहली बार इस मजमुए में छप रही हैं. नाम है- 'रेत सी तुम...'