रस्टी की ज़िन्दगी की कहानियों की कड़ी में यह तीसरी किताब है। रस्टी अपने अभिभावक का घर छोड़ चुका है और कपूर परिवार के साथ रहने आता है। वहाँ वह उनके बेटे किशन को पढ़ाता है और उससे उसकी अच्छी दोस्ती हो जाती है। बेहद सुन्दर किशन की माँ मीना कपूर से रस्टी बहुत प्रभावित है और उनसे बहुत कुछ सीखता है। अचानक मीना की मौत हो जाने के बाद रस्टी और किशन देहरा छोड़ देते हैं और दून घाटी और गढ़वाल के पहाड़ों की ओर निकल जाते हैं। इस दौरान रस्टी और किशन के साथ क्या गुज़रता है यही है इस पुस्तक का ताना-बाना।‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ ‘पद्मश्री’ और ‘पद्मभूषण’ से सम्मानित रस्किन बॉन्ड की अन्य उल्लेखनीय पुस्तकें हैं – रूम ऑन द रूफ़ वे आवारा दिन एडवेंचर्स ऑफ़ रस्टी नाइट ट्रेन ऐट देओली दिल्ली अब दूर नहीं उड़ान पैन्थर्स मून अंधेरे में एक चेहरा अजब-गज़ब मेरी दुनिया मुट्ठी भर यादें रसिया रस्टी जब भाग गया रस्टी की घर वापसी और रस्टी चला लंदन की ओर ।