श्री भगवती प्रसाद द्विवेदी हिन्दी और भोजपुरी के वरिष्ठ और प्रतिष्ठित साहित्यकार हैं। पिछले पाँच-छह दशकों से ये पूरी चेतना और गम्भीरता से साहित्य की सभी विधाओं में निरन्तर लिख रहे हैं छप रहे हैं। द्विवेदी जी बाल-साहित्य के श्रेष्ठतम रचनाकारों में हैं। अनेक राष्ट्रीय सम्मान और अलंकरण इनके नाम हैं। ये भोजपुरी साहित्य के शीर्षस्थ रचनाकारों में हैं। वैसे तो इन्होंने अपेक्षित काव्य-विवेक के साथ सार्थक और समाज-सापेक्ष छन्दमुक्त कविताएँ भी प्रचुर संख्या में लिखी हैं किन्तु इनका कवि-मन छन्द की कविताओं में ज्यादा रमता है। मेरा मानना है कि भगवती प्रसाद द्विवेदी छन्द के सिद्ध और सधे हुए कवि हैं। छन्द का आन्तरिक अनुशासन लय और गति की गूँज-अनुगूँज तथा शब्दों की अंतर्ध्वनि इनके गीत-विवेक की विशिष्टताएँ हैं।