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About The Book
Description
Author
भारतीयों की दो पीढ़ियों से भी अधिक और हर जगह से आए क्रिकेट प्रशंसकों के लिए सचिन तेंदुलकर एक ऐसा नाम है जिसने इस ग्रह पर हर जगह हमेशा दिलों और दरवाज़ों को खोला है। सोशल मीडिया क्रांति के भी दिनों से पहले सचिन सही मायनों में एक वैश्विक अनुप्रतीक थे। चाहे आप सिडनी में हों या साउथ अफ्रीका में कोलकाता में हों या किंग्सटन में इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था सचिन का नाम ही दो लोगों के बीच बातचीत का सिरा जोड़ने के लिए काफ़ी था। वह करामाती किशोर 1989 में पाकिस्तान में अपने नाक से बहते खून के साथ वैश्विक चेतना का अंग बना और उसके बाद बल्लेबाज़ी की दुनिया में एक सनसनी की तरह खेल जगत की सीमाओं से भी पार हो गया। जैसे कि जेसी ओवेन अली पेले और माराडोना ने किया ठीक उसी तरह सचिन ने भी भारतीय क्रिकट को वैश्विक तौर पर एक घरेलू नाम बना दिया जिसे कभी कमतर नहीं आँका जा सकता। यह केवल उनके द्वारा बनाए गए रनों के कारण नहीं था। उन्होंने वे रन कैसे बनाए यह ज़्यादा मायने रखता था उन्होंने अतुलनीय योग्यता के साथ 100 अंतर्राष्ट्रीय शतक बना लिए। हम सचिन के पचासवें जन्मदिन का उत्सव किस रूप में मनाते? एक शिशुवत स्वर वाली जन्मजात प्रतिभा जिसने किशोरावस्था में ही प्रचुर संख्या में शतक लगाए? या फिर एक ऐसे लीजेंड के तौर पर जिसने भारत को कई बार जीत का सेहरा पहनाया? या फिर एक ऐसा जीनियस जिसके आसपास 1990 के दशक में एक बहुत अच्छे भारतीय पक्ष का निर्माण हुआ? 1980 और 90 के दशक में पले-बढ़े प्रशंसकों की पीढ़ी के लिए पहले सचिन थे और फिर बाक़ी कुछ और आता था। उनमें से कई लोग तो शायद इस दुनिया में भी नहीं होंगे पर उन्होंने अपने बच्चों के साथ जो किस्से बाँटे होंगे वे हमेशा बने रहेंगे। सचिन के पचासवें जन्मदिन पर उन किस्सों को भी पत्नी शामिल करने का समय आ गया है। भारत और उससे भी परे रहने वालों की जीत ओर से उनके प्रिय स्नेह पात्र को हार्दिक शुभकामनाएँ। सौरव सचिन की तरह उनके किस्से भी अमिट हैं!