अपने आपको मैं एक बेहद सफल इंसान मानती हूँ। एक अच्छी बेटी पत्नी और एक होनहार बेटे की माँ हूँ जिसे मैं अपना हीरो मानती हूँ। पंजाब के एक छोटे से शहर पठानकोट के बड़े परिवार में पैदा हुई। स्नातक अमृतसर में किया। फिर विवाह के बाद मुंबई शिफ्ट हो गई बाकी की पढ़ाई मुंबई में हुई। मुंबई यूनिवर्सिटी से एम0ए0 की शिक्षा हासिल की बी0एड0 भी यहीं से किया। 9 वर्ष तक गुरु नानक इंग्लिश हाई स्कूल में अध्यापन का कार्य किया।बचपन से ही कविताएं लिखने का शौक था। लेकिन कभी नहीं सोचा था कि पुस्तक छपवाऊँगी। बस चुपचाप लिखती थी अपने विचारों के बहाव में हमेशा बहती रहती। जो लिखा सिर्फ सच्चा ईमानदारी और खुद का लिखा नकल नहीं की। इसको मैं अपना कह सकती हूँ जिसे हम हर चीज में शुद्धता/पवित्रता ढूँढ़ते हैं ठीक वैसे ही मैं अपने विचारों को एक शुद्धता/पवित्रता देने की छोटी सी कोशिश करती हूँ अपने आप से प्रभावित भी होती हूँ। ये सारी कविताएं मैं अपने आप को ही समर्पित करती हूँ। तुम मेरी रचना हो मेरे विचार हो मेरी भावनाएं हो। चाहे नजरिया किसी और को मद्देनजर रख बनाया हो लेकिन मैं हूँ तुम्हारी जननी जिसमें सिर्फ सच है शुद्धता ही पवित्रता है और मुझे पवित्रता ही पसंद है। मैं उन सब लोगों का शुक्रिया करना चाहती हूँ जिन्होंने इन्हें स्नेह दिया और उनका भी जिन्होंने अलगाव दिखाया। जीवन में हर कोई महत्वपूर्ण है- चाहने वाले भी और न चाहने वाले भी क्योंकि दोनों ही से हम निखरते हैं। आशा करती हूँ जो भी पढ़ेगा उसके दिल को यह जरूर छुएगी। शुक्रिया धन्यवाद!हमारे प्रयास ही हमारी पहचान है। हम रहें न रहें इनमें ही तो हमारी जान है.....