यह संस्मरण हमें एक ऐसी दुनिया से परिचित कराता है जहाँ प्रेम अन्नत को भी लांघ जाता है। वह दुनिया अपनों की है। रिश्तों में लगाव जब असीम शब्द के नजदीक खिसकता जाता है तो वही लगाव उन्हें इतना गंभीर बना देता है कि उनके बिना जीने की कल्पना मात्र भीतर तक सुन्न कर देती है।