इस उपन्यास में महान पराक्रमी कर्ण के अंतद्र्वंद्वों और चुनौतियों को उद्वेलित करने वाली कथा दी गई है। इसी के साथ इसमें धर्मराज युधिष्ठिर की अंतरवेदना हरेक के प्रति न्याय की भावना सही गलत अच्छे बुरे के लिए जानने की शक्ति को दर्शाया गया है और इसके अंत में दी को विचित्र परिस्थितियों से गुजरते हुए और हर बार चट्टान की तरह दुढ खड़े दिखाया गया है|