इधर दो पारा शिक्षक बने सरकारी स्कूल के शिक्षक! उधर राजमहल की दुर्गम पहाडीयों में स्तिथ दो स्कूल करता है उनका इन्तजार! 1962 के बाद दो शिक्षक उन पहाड़ी गांवों में पहुँचते है और फिर शुरू होता है उनका कठिन रास्ता भाषा और जानलेवा खतरनाक घटनाएं! साहिबगंज: THE HILLS HAVE DARK SKY दूर-दराज के गांवों में सरकारी स्कूल की जर्जर स्थिति और उस गांव में रहने वाले बच्चों को बुनियादी शिक्षा की कमी का ज्वलंत विवरण है। दो सरकारी शिक्षकों की सच्ची कहानी जो सभी बाधाओं के बावजूद उन दूरदराज के गांवों के बच्चों को शिक्षित करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। साहेबगंज जिले के बरहेट प्रखंड के दो निर्जन गाँव बड़ा और छोटा उदाली में दो शिक्षकों की पहली पोस्टिंग होती है। दोनों शिक्षकों द्वारा स्कूल आने जाने के दौरान रोगंटे खड़े करने वाली कहानी जब पहाड़िया जनजाति के लोग अनजाने में उन्हें बच्चा चोर गिरोह समझकर तीर-धनुष से हमला कर देते हैं। कैसे ये दोनों शिक्षक भाषा की चुनौतियों का सामना करते हुए झाड़-फूंक दारू में यकीन करने वाले गांव के बच्चों को पढ़ाते है और उनकी सोच बदलते हैं। साहिबगंज: THE HILLS HAVE DARK SKY दों सरकारी शिक्षकों की साहस और राजमहल पहाड़ियों में आदिम जनजातियों की सोच और बदलाव करने की कहानी है। दाली गांव दिखाता है कि देश के गांव आज भी किस हालत में हैं। यह गांव किसी भी पिछड़े गांव से कई दशक पिछड़ा हुआ है। राजमहल की पहाड़ियों में रहने वाले आदिवासियों का क्या दोष है? क्या उन्हें देश की सुख-सुविधाओं का आनंद लेने का अधिकार नहीं है? प्रधानमंत्री सड़क योजना में चलने का अधिकार नहीं? शिक्षा का अधिकार नहीं?