जीवन कभी सहज; तो कभी दुर्गम है। जीवन प्रतिपल परिवर्तनशील परिस्थितियों का संगम है। मेरी कविताएँ विषमताओं से परिपूर्ण जीवन और स्वार्थपरक समाज के प्रति मेरे दर्शन की परिचायक हैं। निःसंदेह 'साहित्य सरिता' मनोभावों की वह सरिता है जिसके एक तट पर मैं और दूजे तट पर मेरे पाठक गण खड़े हुए हैं। क्यों न हम सब कुछ क्षणों के लिए इस सरिता की मनोहर लहरों में डूबकर अपनी-अपनी साहित्य-पिपासा बुझा लें ...?