SAHITYA VIMARSH BANAM SAMAJ VIMARSH
shared
This Book is Out of Stock!


*COD & Shipping Charges may apply on certain items.
Review final details at checkout.

LOOKING TO PLACE A BULK ORDER?CLICK HERE

191
225
15% OFF
Paperback
Out Of Stock
All inclusive*

About The Book

हमारे समाज में आज भी लिंग वर्ण जाति आर्थिक विषमता आदि के आधार पर घोर असमानता परिव्याप्त है। साहित्य में ये विमर्श वंचित वर्ग के हक के लिए बुलंद करने वाली आवाज़ के समाहार हैं जिनके अंतर्गत उपेक्षित वंचित पिछड़ा वर्ग स्त्री दलित वर्ग आदिवासी वर्ग किन्नर वर्ग या अन्य वर्ग भी शामिल है। वर्तमान में स्त्री दलित आदिवासी किन्नर प्रवासी बाल वृद्ध अल्पसंख्यक किसान दिव्यांग पर्यावरण आदि विमर्शों के माध्यम से संबंधित वर्ग को हाशिए से मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जा रहा है। हाशिए के समाज से तात्पर्य ऐसे समाज से है जो शोषित पीड़ित दमित वंचित व उपेक्षित तथा मुख्यधारा से बहिष्कृत जीवन जीने के लिए अभिशप्त है। हाशिए में पड़े समाज का उद्धार न तो शासन करता है न ही समाज। वर्चस्ववादी सत्ताधारी स्वार्थी वर्ग ऐसी षडड्ढंत्रकारी व्यवस्था निर्मित करता है जिससे हाशिए का समाज कभी भी मुख्यधारा में शामिल नहीं हो पाता है। यह अस्मितामूलक विमर्श हाशिए में चले गए लोगों को केंद्र में लाने का कार्य करता है। एक हद तक हिंदी साहित्य इसमें सफल है। इन विविध विमर्शों पर हिंदी साहित्य की जो देन है वह इस पुस्तक का विषय है। अतः समकालीन साहित्य के इन विविध विमर्श के साथ भाषा के अन्य विषय जैसे कार्यालयी हिंदी राजभाषा हिंदी आदि विषयों पर भी कुछ लेख इसमें शामिल हैं। --रम्या जी.एस.नायर
Piracy-free
Piracy-free
Assured Quality
Assured Quality
Secure Transactions
Secure Transactions
Fast Delivery
Fast Delivery
Sustainably Printed
Sustainably Printed
downArrow

Details