समाधि की सुराहीयह एक आनंद की बात है हमारी विस्मृत हो रही धरोहर से ओशो ने हमारी आज की भाषा में हमारा एक बार फिर से परिचय करवा दिया है। जो आज तक संस्कृत में था पाली में था प्राकृत में था और दुरुह जिसकी टीकाएं व्याख्याएं होती रहो र्थी वह सारा ज्ञान सरल हिन्दी और अंग्रेजी में हमें ऐसी जीवंतता के साथ ओशो ने उपलब्ध करवा दिया कि हम उसकी मौलिकता को छू सकते है उसकी ऊंचाई पर चढ़कर सांस ले सकते हैं उसकी गहराइयों में उत्तर सकते हैं।सुनो भई साधोकबीर अनूठे हैं और प्रत्येक के लिए उनके द्वारा आशा का द्वार खुलता है। क्योंकि कबीर से ज्यादा साधारण आदमी खोजना कठिन है। और अगर कबीर पहुंच सकते हैं तो सभी पहुंच सकते हैं। कबीर निपट गंवार हैं इसलिए गंवार के लिए भी आशा है बे-पढ़े-लिखे हैं इसलिए पढ़े-लिखे होने से सत्य का कोई भी संबंध नहीं है। जाति-पांति का कुछ ठिकाना नहीं कबीर की-शायद मुसलमान के घर पैदा हुए हिंदू के घर बड़े हुए। इसलिए जाति-पांति से परमात्मा का कुछ लेना-देना नहीं है। कबीर जीवन भीर गृहस्थ रहे-जुलाहे-बुनते रहे कपड़े और बेचते रहे घर छोड़ हिमालय नहीं गए। इसलिए घर पर भी परमात्मा आ सकता है हिमालय जाना आवश्यक नहीं। कबीर ने कुछ भी न छोड़ा और सभी कुछ पा लिया। इसलिए छोड़ना पाने की शर्त नहीं हो सकती। और कबीर के जीवन में काई भी विशिष्टता नहीं है। इसलिए विशिष्टता अहंकार का आभूषण होगी आत्मा का सौंदर्य नहीं। कबीर न धनी हैं न ज्ञानी हैं न समादृत हैं न शिक्षित हैं न सुसंस्कृत हैं। कबीर जैसा व्यक्ति अगर परमज्ञान को उपलब्ध हो गया तो तुम्हें भी निराश होने की कोई भी जरूरत नहीं। इसलिए कबीर में बड़ी आशा है।-ओशोपुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदुःमुमुक्षा का क्या अर्थ है?हृदय में विवेक का क्या अर्थ होता है।प्रेम के कितने रूपधर्म और संप्रदाय में भेदमृत्यु के रहस्य
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